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सोमवार, 27 मई 2013

ब्रज बांसुरी" की रचनाएँ...भाव अरपन पांच ...तुकांत रचनायें ...सुमन-६..प्यादे ...

ब्रज बांसुरी" की रचनाएँ .......डा श्याम गुप्त ...                         


                     मेरे शीघ्र प्रकाश्य  ब्रजभाषा काव्य संग्रह ..." ब्रज बांसुरी " ...की ब्रजभाषा में रचनाएँ  गीत, ग़ज़ल, पद, दोहे, घनाक्षरी, सवैया, श्याम -सवैया, पंचक सवैया, छप्पय, कुण्डलियाँ, अगीत, नव गीत आदि  मेरे अन्य ब्लॉग .." हिन्दी हिन्दू हिंदुस्तान " ( http://hindihindoohindustaan.blogspot.com ) पर क्रमिक रूप में प्रकाशित की जायंगी ... ....
        कृति--- ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा में विभिन्न काव्यविधाओं की रचनाओं का संग्रह )
         रचयिता ---डा श्याम गुप्त 
                     ---  श्रीमती सुषमा गुप्ता 
प्रस्तुत है भाव अरपन पांच ...तुकांत रचनायें ...सुमन-६..प्यादे ...

हम तौ हैं प्यादे ज़नाब ,
चलत रहें सूधे ही सूधे |
 

होय जायं  टेड़े जो जनाब ,
बनि जाएँ राजा-वजीर |
बदल जाय हाथन की तकदीर,
होय जाय राजा की मात |
हम तौ हैं प्यादे जनाब,
चलत रहें पीछे ही पीछे ||

हम राजा के आगें चलिहें ,
हम राजा के पीछे चलिहें |
दायें चलिहें, बाएं चलिहें ,
हम ही तौ रक्षक जनाब |
हम तौ हैं प्यादे जनाब, 
चलत रहें पीछे ही पीछे ||

सब ते आगें हम ही जावें ,
रन भेरी हू हमहि बजावैं |
पतिया पहुंचावें औ लावें ,
हम ही सब संदेस सुनावें |
गुप्तचर हू हमहिं जनाब,
चलत रहें पीछे ही पीछे ||

महल, किलौ, दफ्तर मग अंगना ,
सबहि ठाम है  काज हमारो|
हम सूधे साधे गण के जन ,
धुनि  के  पक्के  जनाब |
हम तौ हैं प्यादे जनाब,
चलत रहें पीछे ही पीछे ||










 

शुक्रवार, 10 मई 2013

ब्रज बांसुरी" की रचनाएँ ...भाव अरपन-- तीन---गीत ....सुमन-८..चलौ न टेड़ी चाल... ....डा श्याम गुप्त ...

  ब्रज बांसुरी" की रचनाएँ .......डा श्याम गुप्त ...                         


                     मेरे शीघ्र प्रकाश्य  ब्रजभाषा काव्य संग्रह ..." ब्रज बांसुरी " ...की ब्रजभाषा में रचनाएँ  गीत, ग़ज़ल, पद, दोहे, घनाक्षरी, सवैया, श्याम -सवैया, पंचक सवैया, छप्पय, कुण्डलियाँ, अगीत, नव गीत आदि  मेरे अन्य ब्लॉग .." हिन्दी हिन्दू हिंदुस्तान " ( http://hindihindoohindustaan.blogspot.com ) पर क्रमिक रूप में प्रकाशित की जायंगी ... .... 
        कृति--- ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा में विभिन्न काव्यविधाओं की रचनाओं का संग्रह )
         रचयिता ---डा श्याम गुप्त 
                     ---  श्रीमती सुषमा गुप्ता 

प्रस्तुत है ---भाव अरपन तीन --गीत ...सुमन -८.. चलौ न टेड़ी  चाल ....

सूधी चलतौ चाल रहे वो ,
चलै न टेड़ी चाल |
प्यादौ बनौ रहे जीवन भरि  ,
चेहरा पै न मलाल |

टेड़ी चाल सीखि बनि जावै,
प्यादौ कबहूँ  वजीर |
बड़े -बड़ेंन कौ दिल दहलाबै, 
काँपैं साह-बजीर |

सत्ता वारे सूधी-साधी ,
जनता कौं न सताऔ |
सूधे मोहरा बनें न टेड़े ,
करिकें काम दिखाऔ |

नांहि तौ प्यादौ नाखुस है कें,
चलही जु टेड़ी चालि |
सब टेड़ेनि कों सूधौ करिदे,
सीखहु सूधी चालि |

ये जनता है सबही जानै,
को सूधौ को टेडौ |
बस गुपचुप देखिबै ही करै,
कब होजाय  सवैरो |

पै यामिनि गहराबै गहरी ,
तौ ये होस संभारै |
बड़े बड़े दिग्गज-दिक्पालन ,
कों उलटौ करि  डारै |

हर प्यादे कौं खुस रखिबौ ,
तौ , सबहि  होंय खुसहाल |
प्यादौ सूधौ बनौ रहै, बस -
चलौ न टेड़ी चाल ||