शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

बाल गीत ...शिव जी....डा श्याम गुप्त...

नाग गले में लिपटे रहते ,
चन्दा माथे पर जिनके                     
जटाजूट में गंगा बहती,
है त्रिशूल कर में उनके ||

नेत्र तीसरा है मस्तक पर,
नीला कंठ सुहाया है |
कटि पर हैं  मृगछाला बांधे,
तन पर भस्म रमाया है ||

बच्चो ! ये भोले शंकर हैं,   
शिव-शंभू भी कहलाते |
देवों के भी देव हैं, इससे-
महादेव बोले जाते ||

अर्थ ये लिपटे नागों का है ,
दुष्टों को बस में करते |
फिर भी शीतल रहे ह्रदय, वे-
चन्दा माथे पर धरते  ||

जग के कष्टों का विष पीकर,
नीलकंठ बन जाते हैं |
सत तम रज का त्रिशूल थामे,
प्रेम की गंगा बहाते हैं ||

8 टिप्‍पणियां:

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग ने कहा…

Badhiya rachna.

dheerendra ने कहा…

बेहतरीन पोस्ट ,...बहुत सुंदर

मेरे पोस्ट में आइये................
आज चली कुछ ऐसी बातें,बातों पर हो जाएँ बातें

नयनों में जब होतीं बातें, क्या समझोगे ऎसी बातें
हर भाषा में होतीं बातें, कुछ सच्ची कुछ झूठी बातें
हार की बातें जीत की बातें, गीत और संगीत की बातें
ज्ञान और विज्ञान की बातें, हर मौसम पर करते बातें

आपका स्वागत है,.....

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

ॐ नमः शिवाय

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद चौवे जी...

shashi purwar ने कहा…

bahut sunder ,manmohak prastuti . blog pasand aaya .

aapka shukriya ki aapne apna anmol samaye aur samiksha mere blog par diya ..dhanyavad

कौशल किशोर ने कहा…

बिच्छू झींगुर नंदीबाबा
ये सब हैं इनके चेले हैं
बेलपत्र और दूध से बच्चों
सारे दुःख हर लेते हैं.
बच्चों ये हैं भोले बाबा
सबको अपना कहते हैं
इनको जो भी नमन करे
तो सारी खुशियाँ दे देते हैं....

बहुत सुन्दरता से आपने बच्चों के लिए भोले बाबा का बखान किया
आपको बहुत बहुत बधाई......
सर कभी समय मिले तो मेरा ब्लॉग पढ़िए ...
http://dilkikashmakash.blogspot.com/

RITU ने कहा…

वाह वाह ..बहुत सुन्दर लयबद्ध पंक्तियाँ ..
शिवजी पर बहुत प्यारी कविता ..
kalamdaan.blogspot.com

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद शशि जी, कौशल जी व रितुजी .....बम बम भोले...